जुल्फ़ बिखराकर, उफ़ तिरछी नजर का कहर, मार डाले कई आशिक यूँ ही बिना दिए जहर

ढूंढता चला हूँ मैं गली गली बहार की, बस इक छांव ज़ुल्फ़ की बस इक निगाह प्यार की

इन घटाओ ने जोरदार बारिश लाई है, लगता है किसी ने फिर से जुल्फ़ें बिखराई है

गुलों की तरह हम ने ज़िंदगी को इस कदर जाना किसी की ज़ुल्फ़ में इक रात सोना और बिखर जाना

न झटको ज़ुल्फ़ से पानी ये मोती टूट जाएँगे तुम्हारा कुछ न बिगड़ेगा मगर दिल टूट जाएँगे

गालो पर जो तुमने जुल्फें गिरा दी, मुझ जैसे कई बिचारो की नींदे उड़ा दी

ऐ जुनूँ फिर मिरे सर पर वही शामत आई फिर फँसा ज़ुल्फ़ों में दिल फिर वही आफ़त आई

फिर न सिमटेगी मोहब्बत जो बिखर जायेगी, ज़िंदगी ज़ुल्फ़ नहीं जो फिर संवर जायेगी

तेरी जुल्फों का वो Clip बन जाऊं, जुल्फों से हटू तो तेरे लबो में दब जाऊं.

उन्होंने जुल्फों को खोला शहर में काली घटाएं छाई है, वो निकले है काले लिवाज में लगता है कयामत आई है