बहुत ही याद आता है मेरे दिल को तड़पाता है, वो तेरा पास न होना मुझ को बहुत रुलाता है

बहुत तड़पाया है किसी की बेबस यादों ने, ऐ ज़िंदगी खत्म हो जा अब और तड़पा नहीं जाता

कुछ कर अब मेरा भी इलाज ऐ हकीम-ए-मुहब्बत, हर रात वो याद आता है और मुझसे सोया नहीं जाता

अहसास मिटा,तलाश मिटी, मिट गई उम्मीदें भी, सब मिट गया पर जो न मिट सका वो है यादें तेरी

कभी कभी किसी अपने की इतनी याद आती है की रोने के लिए रात भी कम पड़ जाती है

बैठे थे अपनी मस्ती में कि अचानक तड़प उठे, आ कर तुम्हारी याद ने अच्छा नहीं किया

उसकी याद आई है साँसों जरा अहिस्ता चलो, धड़कनों से भी इबादत में खलल पड़ता है

अब उसकी शक्ल भी मुश्किल से याद आती है, वो जिसके नाम से होते न थे जुदा मेरे लब

कहेगा झूठ वो हमसे तुम्हारी याद आती है, कोई है मुन्तजिर कितना ये लहजे बोल देते हैं

तू देख सकता काश रात के पहरे में मुझको, कितनी बेदर्दी से तेरी याद मेरी नींद चुरा लेती है